NEET पेपर लीक विवाद 2026: CBI जांच तेज, कई राज्यों से हिरासत में लिए गए 7 आरोपी

NEET UG 2026: परीक्षा रद्द और पुनः परीक्षा कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

NEET पेपर लीक विवाद 2026: CBI जांच तेज, कई राज्यों से हिरासत में लिए गए 7 आरोपी

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Testing Agency द्वारा आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों के बाद मामला अब जांच एजेंसियों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। वहीं, इस मामले में अलग-अलग राज्यों से अब तक 7 आरोपी हिरासत में लिए गए हैं। 

3 राज्यों में हिरासत, कई आरोपी जांच के घेरे में

पेपर लीक मामले में अब तक महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा से कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें महाराष्ट्र से ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे, अहिल्यानगर निवासी धनंजय लोखंडे और नासिक से शुभम खैरनार शामिल हैं। राजस्थान में सीकर के एक कंसल्टेंसी संचालक राकेश मंडवरिया सहित दो अन्य आरोपियों को पकड़ा गया है, जबकि हरियाणा के गुरुग्राम से BAMS फर्स्ट ईयर के छात्र यश यादव को हिरासत में लिया गया है। सभी से पूछताछ जारी है।

राजस्थान में 1000 छात्रों तक पहुंचा पेपर

राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के अनुसार, यह आशंका जताई जा रही है कि पेपर करीब 1000 उम्मीदवारों तक पहुंच चुका था। यह खुलासा जांच को और गंभीर बना देता है, क्योंकि इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जांच एजेंसियां अब नेटवर्क और पैसे के लेन-देन की भी जांच कर रही हैं।

CBI और कोर्ट की निगरानी में जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए Central Bureau of Investigation को भी जांच में शामिल किया गया है। एजेंसी सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसी बीच मामला Supreme Court of India तक पहुंच गया है, जहां फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने याचिका दायर कर परीक्षा को कोर्ट की निगरानी में दोबारा कराने और NTA के पुनर्गठन की मांग की है।

छात्रों में असमंजस, भविष्य पर सवाल

22 लाख से अधिक छात्रों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था। लेकिन पेपर लीक की खबरों और कानूनी लड़ाई के बीच छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई छात्र संगठनों ने निष्पक्ष परीक्षा प्रक्रिया की मांग की है। अब पूरा मामला जांच रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर है। यदि आरोप साबित होते हैं तो परीक्षा प्रक्रिया और परिणामों पर बड़ा असर पड़ सकता है।